About Us

Parikrama Seva Sansthan

Know About Parikrama

Parikrama Seva Sansthan sees Akhanda Parikrama as his immortal practice through planetary constellations, bodies, meteor bodies in the entire universe. With this immortal practice, he automatically gets the energy, impulse, fertilization, flotation, ability, gratitude force for eternal life, all the basis to acquire the new, immersion of the old and biographical power for eternal life editing. Therefore, the earth in 24 hours on its axis. 01 times, 365 days in a round of the Sun with the bodies of fellow planets. Is circling. Thousands of Mandakini are in Akasha Ganga and thousands of Akash Ganga are Brahmanda in Akhanda Parikrama in Mandakini. Mankind revolves around religious ceremonies. The competition of the gods in the Vedas was based on circumambulation. Those who revolve first and come first are considered successful. Shri Ganesh Bhagavan, before Kartikaya Bhagatwan, became the first worshiper among the deities after the parents' circumambulation. In Hinduism, marriage rituals, cremation, sacrificial rituals, tirtho, circumambulation of divine trees, vat trees, temples, etc. have been going on since the time of Santhana. In Islam, Haji people use the Kaaba. Which is called Tawaf. On the occasion of Muharram, Imambados, curbs, mausoleums are put around people. Lakhs of people have been putting their place in the mausoleums to prevent their incurable diseases and problems. Safa, the hill of Marwa is famous around the world.

The Parikrama is done with power over itself. Due to which the lower ones continue to receive divine power from the above and receive the necessary charge for life. The electron inside the atom is orbiting the proton. Which keeps the charge in it. humanBy orbiting the planet, it remains charged like the constellations. Due to which, full energy is available for life. Human race is only circumambulation in the lap of nature. Only a few people do something for a few moments by themselves. Therefore, the basis of human life has become less baseless. From birth, life goes into crisis. He dies at a young age. Few people live 100 - 150 years of life. Being 50 - 60 years old, thousands of diseases dying in existence are not the main reason. Parikrama Viratha with the power of the universe in the universe, Akash Ganga, Akash Ganga in the sky Mandakini, Mandakini from Shaur Circle in the solar system from the solar system, planetary bodies in the earth, life in the earth, life in the earth, mountain habitats, humans in their habitats, village area, country Each is located as 07 Shakti Kendra in the world. Mulaadhachakra, Sawadhistan, Manipur, Anahd, Vishuddha is established with the commandment and Sah Chakra Jamn. Through the revolutions, these power centers respectively come from the lower ones. Few people know this. The main ritual and sarcasm of religions is to awaken them in Shakti Kendras. The more a person who awakens this power center, the stronger his life is. Maha Mrityunjaya Mantra, Gayatri Mantra, Panchadhari Mantra, all other mantras are the ultimate form of chanting and meditation. At present, the only natural causes of earthquakes, storms, storms, floods, catastrophes, incurable growing diseases and short age are not the only reasons to revolve around the world. After this, the virtues of the world, tapasadhana, fast, austerities are not available. Orbiting from right to left worship house or anywhere on its axis, along with twenty three Koti Devi sees all the planet Nhatras, the life force of the universe comes in us.

All the diseases of the present time can be equated in the Sakit Parikrama, charged with Parikama. By doing Parikrama, the sacrament, devotion, mukti, the deity of Gods, Artha, Dharma, Kama, Mokya Prati are smoothed. Diseases whose immediate diagnosis starts with circumference. Heart disease, any kind of kidney failure, any type of tumor disease, brain, levitation stop, disturbance, Anindra Devni, any kind of head breast, ganth pandharaya tug, infertility etc. every day, the time of accident is not in the death year . After the research on circumambulation, the nature of treatment with medical signs will change. All treatment is possible from this. The flying power float, like Prah - Nayan, Puruchakarshan balanval - comes within forty days. It is necessary to contact and receive rituals. The operation of the Driver Training Center is currently responsible for accidents and premature deaths. Most people are doing illegal operations without acquiring technical knowledge. For this, the institute will run light vehicle, heavy driver training center in all the districts of Jharkhand state. District for this work. Restoration of Coordinator - Road Motivator at Block and Panchayat level has been started on contract basis. The first is being done in Hazaribagh and Ramgarh. Then in Chhotnagpur division, then Rajan will have about five thousand jobs for this work in all the divisions. Any unemployed youth from 18 years to 35 years of age can be a candidate for application.

परिक्रमा सेवा संस्थान


समस्त ब्रम्हांड, सृष्टि, जीवन एवं यात्रा का समस्त आधार|

परिक्रमा सेवा संस्थान संपूर्ण ब्राह्मण में गृह - नक्षत्रों, पिंडों, उल्का पिंडों के द्वारा अखण्ड परिक्रमा को उनकी अमर साधना के रूप में देखती है इस अमर साधना से उनके अनंत जीवन के लिए उर्जा आवेग, आवैस, सन्तुलन,प्लावन, क्षमता, गुतकषण-बल, समस्त अधार, नया को ग‌हृण करने पुराने को विसर्जन करने एवं अनंत तरह के अनंत जीवन संपादन के लिए जीवनी शक्ति स्वात: मिलता रहे इसीलिए पृथ्वी अपने अक्ष पर 24 घंटे में एक बार 365 दिन में सूर्य की एक चक्कर साथी ग्रहों के पिंडों के साथ परिक्रमा कर रही ह। हजारों शौर मंडल मंदाकिनी में हजारों मंदाकिनी अकाशा गंगा एवं एवं हजारों आकाश गंगा ब्राह्मण में अखंड परिक्रमा है। मानव जाति धार्मिक आयोजन में परिक्रमा करती है। वेदों में देवताओं का प्रतिस्पर्धा परिक्रमा आधारित होता था । जो परिक्रमा कर पहले आते वही सफल माने जाते। श्री गणेश भगवान कार्तिकाय भगवान से पहले माता-पिता के परिक्रमा के पश्चात देवताओं में प्रथम पूजा के अधिकार बने। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार, दाह संस्कार, यज्ञ संस्कार, तीर्थों, दिव्य वृक्षों, वट वृक्षों,मंदिरों, इत्यादि की परिक्रमा सनातन काल से चला आ रहा है। इस्लाम धर्म में हाजी लो काबा का फेरा लगाते हैं। जिसे तवाफ कहा जाता ह। मोहर्रम के मौके पर इमामबाड़ों, कबलो, मजारों का फेरा कमरबंद लगाते हैं। लाखों लोग गजारो में फेरा लगाकर अपने असाध्य रोग एवं समस्याओं का निवारण करते आ रहे हैं। सफा मरवा की पहाड़ी का फेरा लगाना विश्व प्रसिद्ध है। परिक्रमा अपने से ऊपर शक्तिशाली से किया जाता है। जिसने नीचे वाले को ऊपर वाले की दिव्य शक्ति मिलती रहती है एवं जीवन के लिए आवश्यक आवेश प्राप्त होता रहता है। परमाणु के अंदर इलेक्ट्रॉन प्रोटोकॉल का परिक्रमा कर रहा है। जिससे उसमें आदोसा बना रहता है। मानव द्वारा परिक्रमा करने से ग्रह -नक्षत्र पिंडों के तरह वह आवासित रहते हैं जिससे जीवन में संपूर्ण ऊर्जा मिलते रहता है।मानव जाति प्रकृति की गोद मैं केवल परिक्रमा माय है। स्वयं केवल कुछ ही संस्कारों द्वारा कुछ ही पल कुछ लोग करते हैं। इसीलिए मानव का जीवन अल्प निराधार हो गया है। जन्मजात से संकट में जीवन डूबता चला जाता है। अल्प आयु में मृत्यु हो जाती है। 100-150 वर्ष का जीवन कुछ लोग ही जी पाते हैं। 50- 60 वर्ष होते- होते हजारों बीमारियों का अस्तित्व में आना मृत्यु हो जाना मुख्य कारण अन्य कुछ नहीं है। परिक्रमा विरात विव्य शक्ति से ब्रह्मांड में ब्रह्मांड से आकाशगंगा, आकाशगंगा से मंदाकिनी, मंदाकिनी से सौर्य मंडल में सौर्य मंडल से ग्रहों पिंडो पृथ्वी से जीवन में अनु- प्रमाणु,समुंद्र ,पहाड़ पर्वत अस्तित्व में मानव में उनके आवास गांव क्षेत्र, देश विश्व में प्रत्येक में 7 शक्ति केंद्र के रूप में स्थित है। मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान मनीपुर, अनाहद विशुद्ध आज्ञा एवं यह चक्र से स्थापित है। परिक्रमा के माध्यम से इन शक्ति केंद्रों को जगाने के लिए होता है। जिस मानव ने यह शक्ति केंद्र जितना ज्यादा जागृत होता है जीवन इतना मजबूत होता है। महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र पंचिरी मंत्र, अन्य सभी मंत्र जाप और ध्यान परिक्रमा का ही परम स्वरूप है। वर्तमान समय में विश्व से घटित प्राकृतिकता आवफदाएं भूकंप, तूफान ,जल प्रलय, प्रलय दुर्घटनाएं ,लाइलाज बढ़ते बिमारियों एवं अल्प आयु का एकमात्र कारण जरूरी अनुसार परिक्रमा नहीं करना है। तदुपरांत संसार, तप साधना व्रत तपस्या ओं का पुण्य नहीं मिल पाता है। अपने अक्ष पर दाएं से बाएं पूजा घर या कहीं भी परिक्रमा करने से सेतिस कोटि देवी-देवताओं के साथ समस्त ग्रह नक्षत्रों ब्रह्मांड की जीवन शक्ति हमारे अन्दर ‌चली आती है।

परिक्रमा से आरोग शक्ति- परिक्रमा में वर्तमान समय में समूस्त लोगों का समुह समाप्त किया जा सकता है। परिक्रमा करने से संसार भक्ति मूर्ति देवी देवताओं का सानिध्य, धर्म ,काम ,मोक्ष प्राप्ति सुलभ मिलती है। परिक्रमा से जिन लोगों का निदान शुरू होता है ह्रदय रोग किसी भी तरह का किडनी फेल किसी तरह का ट्यूमर रोग मानसिक लिवर सिक्योर अशांति और अनिद्रा निंद्रा बेचैनी किसी भी तरह का कैंसर, स्थन गांठ , गर्भ सय ट्यूमर बांझपन इत्यादि प्रतिदिन के परिक्रमा करने से दुर्घटना अकाल मृत्यु के साथ में नहीं होते हैं परिक्रमा पर रिसर्च के बाद मेडिकल साइंस का स्वरूप बदल जाएगा। समस्त इलाज इसी से संभव है। ग्रह नक्षत्रों के तरह उड़ान शक्ति प्लावन गुरुत्वाकर्षण संतुलन 40 दिन के अंदर चला आता है। संपर्क कर सानिध्य संस्कार ग्रहण करना आवश्यक होता है।